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कोयला घोटाला मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई पर तल्ख टिप्पणी की है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई पिंजरे में बंद तोते की तरह है, जो मालिक की भाषा बोलता है. कोर्ट ने कहा कि जो सरकार कहती है सीबीआई वहीं दोहराती है.
कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले और अन्य मामलों की सीबीआई जांच में केंद्र के हस्तक्षेप को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सीबीआई पिंजरे में बंद ऐसा तोता बन गई है जो अपने मालिक की बोली बोलता है.
सीबीआई निदेशक के हलफनामे के अवलोकन के बाद कोर्ट ने कहा कि यह ऐसी अनैतिक कहानी है जिसमें एक तोते के कई मालिक हैं.
सीबीआई अधिकारियों से मिलने और रिपोर्ट के प्रारूप में बदलाव के सुझाव देने के लिये सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिवों को आड़े हाथ लिया.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि सीबीआई को स्वतंत्र करने के लिए क्या किया गया है.
'सीबीआई का काम सच्चाई का पता लगाना, विचार विमर्श करना नहीं'
कोर्ट ने कहा कि सीबीआई का काम सरकारी अधिकारियों से विचार विमर्श करना नहीं बल्कि सच्चाई का पता लगाने के लिये पूछताछ करना है. सीबीआई को पता होना चाहिए कि सरकार और उसके अधिकारियों के दबावों के आगे कैसे खड़ा होना है.
कोर्ट ने कहा कि जांच रिपोर्ट का मूलभाव बदल दिया गया है. जांच रिपोर्ट प्रगति रिपोर्ट नहीं है जिसे सरकार और उसके अधिकारियों के साथ साझा किया जाये.
सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल गुलाम वाहनवती ने न्यायालय में सफाई दी कि कोयला कांड की सीबीआई जांच रिपोर्ट न तो उन्होंने मांगी थी और न ही उन्हें यह मिली. उन्होंने कोर्ट से कहा कि कानून मंत्री के सुझाव पर ही उनकी सीबीआई अधिकारियों के साथ बैठक हुयी.
सुप्रीम कोर्ट कोयला घोटाले में सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा के नये हलफनामे पर सुनवाई कर रही थी.
सीबीआई का हलफनामा: स्थिति रिपोर्ट के प्रारूप में ‘मामूली बदलाव’ किये गये थे
सीबीआई के मुखिया ने इस हलफनामे में खुलासा किया था कि इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने से पहले कानून मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय तथा कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसमें बदलाव किये थे.
इस मामले को लेकर पहले से ही कानून मंत्री अश्वनी कुमार विपक्ष के हमले का निशाना बने हुये हैं. विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है.
रंजीत सिन्हा ने अपने हलफनामे में कहा है कि अटार्नी जनरल ने भी स्थिति रिपोर्ट पर सरसरी निगाह डाली थी और उनके सुझावों पर भी इसमें बदलाव किये गये थे.
न्यायमूर्ति आर एम लोढा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में जांच की स्थिति रिपोर्ट सरकार के साथ साझा करने के बारे में न्यायालय को अंधेरे में रखने के कारण सीबीआई की खिंचाई भी की थी.
उन्होंने हलफनामे में कानून मंत्री अश्वनी कुमार, अटार्नी जनरल गुलाम वाहनवती, अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल हरेन रावल और प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव शत्रुघ्न सिंह तथा कोयला मंत्रालय में संयुक्त सचिव ए के भल्ला के साथ हुयी बैठकों और स्थिति रिपोर्ट के प्रारूप में बदलाव के बारे में उनके सुझावों तथा उनके द्वारा किये गये बदलावों का विवरण दिया था.
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